मत्स्य विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अधिकांश समुद्री प्रजातियों का प्रजनन काल होता है। ऐसे समय में ट्रॉलिंग गतिविधियों से मछलियों के अंडे, किशोर मछलियां और प्रजनन करने वाली मछलियां प्रभावित होती हैं। इसी वजह से समुद्री जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों की रक्षा के लिए यह प्रतिबंध लगाया जाता है।
हालांकि, प्रतिबंध के दौरान केरल के समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक मछुआरों को सतही स्तर पर मछली पकड़ने की अनुमति रहेगी।
विभाग ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने पश्चिमी तट के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में 1 जून से 31 जुलाई तक 61 दिनों के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया है। इस अवधि में बिना मोटर वाली नावों को छोड़कर सभी प्रकार की मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक रहेगी।
ट्रॉलिंग प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मत्स्य विभाग ने 15 मई से सभी तटीय जिलों में 24 घंटे संचालित होने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। इसके अलावा, समुद्री गश्त और बचाव कार्यों के लिए 20 निजी नौकाओं को किराए पर लेने की प्रक्रिया भी जारी है।
विझिंजम और वाइपीन में तैनात मत्स्य एंबुलेंस सेवाएं सक्रिय रहेंगी, जबकि विभाग की नौ एफआरपी नौकाओं को समुद्री सुरक्षा और निगरानी कार्यों में लगाया जाएगा। साथ ही, गोवा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर स्पोर्ट्स से प्रशिक्षित 80 युवा मछुआरों को समुद्री सुरक्षा बल में शामिल करने की तैयारी भी की जा रही है।
मत्स्य विभाग का कहना है कि सभी नौ तटीय जिलों को समुद्री गश्त और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि पहले ही आवंटित की जा चुकी है, ताकि प्रतिबंध अवधि के दौरान नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।
Author: JAN TV Editorial Team
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