भरत भूषण गुप्ता ने बताया कि सबसे पहला पॉलीमर नोट 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने 10 डॉलर के रूप में जारी किया था। आज ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा समेत कई देशों में पूरी तरह पॉलीमर नोट प्रचलन में हैं। उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, यूएई और मिस्र जैसे देशों के पॉलीमर नोट भी अपने संग्रह में शामिल किए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में पॉलीमर नोटों की शुरुआत का उन्हें बेसब्री से इंतजार है। एक बैंकिंग विशेषज्ञ होने के नाते वे नए सिक्योरिटी फीचर्स को समझने और देखने को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बड़े देश में पॉलीमर नोट लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए एटीएम मशीनों, कैश डिस्पेंसर और नोट छापने वाली मशीनों में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे।
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि केंद्रीय बैंक एक बार फिर भारत में पॉलीमर करेंसी नोट लाने की संभावना पर विचार कर रहा है। इससे पहले 2014 में पांच शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया गया था, लेकिन तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब एक बार फिर पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा शुरू होने के साथ ही इनके फायदे, सुरक्षा और व्यवहारिक उपयोग को लेकर बहस तेज हो गई है।
Author: JAN TV Editorial Team
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