वहीं, सितंबर डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट भी 8,629 रुपये यानी 3.59 फीसदी की गिरावट के साथ 2,31,509 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में मजबूती, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बुलियन में मुनाफावसूली की, जिससे चांदी पर दबाव बढ़ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स (COMEX) पर जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 3.57 डॉलर यानी 5.45 फीसदी टूटकर 62.01 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
बाजार की धारणा पर वैश्विक ऊर्जा बाजार के घटनाक्रम का भी असर पड़ा। अमेरिका द्वारा ईरान को 60 दिनों तक तेल बेचने की अनुमति दिए जाने से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में सुधार और कुवैत व संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों द्वारा वैकल्पिक सप्लाई रूट मजबूत किए जाने से भी निवेशकों की रणनीति प्रभावित हुई।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के ताजा आंकड़ों पर है, जिनके आधार पर फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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