कार्रवाई के दौरान गांव में भारी तनाव का माहौल देखने को मिला। सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में महिलाएं और स्थानीय लोग बुलडोजर के सामने खड़े हो गए और कार्रवाई रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प भी हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पर पथराव करने का आरोप है। बुलडोजर चलते ही कई महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर रोती-बिलखती नजर आईं।
प्रशासन का कहना है कि सभी कब्जाधारियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले नोटिस दिए गए थे और मकान गिराने से पहले अंतिम नोटिस भी जारी किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन "शामिलात चरागाह" यानी सरकारी साझा चरागाह भूमि है, जिस पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था।
वहीं ग्रामीणों का दावा है कि यह जमीन उनके पूर्वजों की है और जमीन के रिकॉर्ड में आज भी उनके परिवारों के नाम दर्ज हैं। उनका कहना है कि वर्षों पहले ग्राम सभा ने जरूरतमंद परिवारों को इसी जमीन पर बसने की अनुमति दी थी और पिछले 35 से 40 वर्षों में करीब 85 परिवार यहां बस गए थे।
ग्रामीण विष्णु प्रसाद ने आरोप लगाया कि करीब 30 मकान प्रधानमंत्री आवास योजना और दो मकान इंदिरा आवास योजना के तहत बनाए गए थे, जिन्हें भी बुलडोजर से गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार आठ पीढ़ियों से यहां रह रहा है और स्थानीय नेताओं ने भरोसा दिया था कि किसी का घर नहीं टूटेगा। उनका आरोप है कि पुनर्वास की बात कही गई, लेकिन कार्रवाई से पहले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
एक अन्य महिला रेवती पाल ने बताया कि उन्हें छह महीने पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिला था। सरकार से स्वीकृत 1.20 लाख रुपये में से केवल एक लाख रुपये मिले, जबकि घर पूरा करने के लिए उन्हें 2 से 2.5 लाख रुपये तक का कर्ज लेना पड़ा। अब घर टूटने के बाद उनके परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन को विधायकों की प्रस्तावित कॉलोनी के लिए खाली कराया जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
प्रशासन ने कहा है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नवा रायपुर के सेक्टर-30 में की गई है। वहां आवास, भोजन, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेंस, डॉक्टर, बस और सामान ढोने के लिए मालवाहक वाहनों की व्यवस्था की गई है। सामान की सुरक्षा के लिए राजस्व विभाग के कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है।
धारसिंवा से बीजेपी विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि किसी भी जरूरतमंद परिवार के साथ अन्याय नहीं हुआ है और सभी विस्थापितों को नए घर आवंटित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह जांच कराई जाएगी कि सरकारी योजनाओं के तहत कथित अतिक्रमण वाली जमीन पर आवास कैसे स्वीकृत हुए।
गौरतलब है कि तहसीलदार अदालत से बेदखली आदेश जारी होने के बाद से ग्रामीण अप्रैल महीने से लगातार विरोध कर रहे थे। नोटिस के अनुसार, खसरा नंबर 460 की करीब 15.47 हेक्टेयर (लगभग 38 एकड़) जमीन पर अवैध कब्जा बताया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने वर्षों तक इसी इलाके में बिजली, जल जीवन मिशन के तहत पानी की सुविधा और अन्य विकास कार्य कराए, लेकिन अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर बेघर कर दिया गया।
Author: JAN TV Editorial Team
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