जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त, बोले- भविष्य के युद्ध होंगे संयुक्त और समन्वित अभियान आधारित
(DELHI, DELHI) भारतीय सेना के 30वें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मंगलवार को 40 वर्षों से अधिक की शानदार सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति के अवसर पर साउथ ब्लॉक में आयोजित औपचारिक समारोह में उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि अधिक एकीकृत, संयुक्त और समन्वित सैन्य अभियानों पर आधारित होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए—"साथ मिलकर देखना, साथ मिलकर निर्णय लेना और साथ मिलकर कार्रवाई करना।"

जून 2024 में सेना प्रमुख का पद संभालने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने कार्यकाल को गर्व और संतुष्टि से भरा बताया। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल से शुरू हुआ उनका सफर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंचा और चार दशकों से अधिक समय तक देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उसके बहादुर सैनिकों, कमांडरों, पूर्व सैनिकों, सैन्य परिवारों और देशवासियों के भरोसे में निहित है। उन्होंने सेना के सभी जवानों और अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी निष्ठा, अनुशासन और साहस ही भारतीय सेना की पहचान है।

जनरल द्विवेदी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर अपनी अभियानगत तैयारियों को मजबूत किया है। उत्तरी सीमा पर 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' के तहत तैनाती पूरी तरह सतर्क और मजबूत रही, जबकि पश्चिमी सीमा पर 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना की तत्परता और क्षमता का उदाहरण बना। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने बेहतरीन तालमेल और साझा रणनीति के साथ कार्रवाई की।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय सेना लगातार आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। पिछले दो वर्षों में सेना के पुनर्गठन, नई तकनीकों को अपनाने, संयुक्त सैन्य संचालन, सिस्टम सुधार और मानव संसाधन प्रबंधन पर तेजी से काम किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और अधिक मजबूत करना आवश्यक है।

मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र जनरल उपेंद्र द्विवेदी 1984 में जम्मू-कश्मीर राइफल्स में शामिल हुए थे। उन्होंने उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी थिएटर में विभिन्न महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाईं। आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों तक उनके नेतृत्व की व्यापक सराहना हुई।

सेवानिवृत्ति के साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने नए सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। जनरल द्विवेदी ने उन्हें एक अनुभवी और सक्षम सैन्य नेतृत्वकर्ता बताते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नई ऊंचाइयों को हासिल करेगी।

Author: JAN TV Editorial Team

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