सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.7 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी काफी अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी को छोड़कर 2026 के हर महीने विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी के बाद फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। हालांकि मार्च में स्थिति पूरी तरह बदल गई और एफपीआई ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये और जून में 49,340 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।
हालांकि जून के अंतिम दिनों में बिकवाली की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी, लेकिन शुरुआती दिनों में हुई भारी निकासी की भरपाई नहीं हो सकी।
विदेशी पूंजी प्रवाह का चालू खाते के घाटे और भुगतान संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए। इनमें वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जुटाई गई एफसीएनआर (FCNR) जमा पर हेजिंग लागत वहन करना, फॉरेक्स स्वैप विंडो का विस्तार, फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी बॉन्ड में निवेश की सुविधा बढ़ाना तथा अनिवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) के लिए घरेलू शेयरों में निवेश सीमा बढ़ाना शामिल है।
वहीं, इक्विटी बाजार से निकासी के उलट विदेशी निवेशकों ने जून में डेट मार्केट में निवेश जारी रखा। एफपीआई ने FAR रूट के जरिए 21,652 करोड़ रुपये और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के माध्यम से 3,246 करोड़ रुपये का निवेश किया।
Author: JAN TV Editorial Team
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