गीता प्रेस लाएगी भगवद् गीता का त्रिभाषी संस्करण, संस्कृत के साथ हिंदी और अंग्रेजी में भी होगी व्याख्या
(Gorakhpur, Gorakhpur) धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध गोरखपुर की गीता प्रेस जल्द ही **भगवद् गीता** का एक विशेष त्रिभाषी संस्करण प्रकाशित करने जा रही है। इस संस्करण की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें पहली बार संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी को एक ही पुस्तक में समाहित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग गीता के संदेश को आसानी से समझ सकें।

गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी के अनुसार, इस नए संस्करण में प्रत्येक श्लोक मूल संस्कृत में दिया जाएगा। इसके साथ ही उसी श्लोक का रोमन लिपि (अंग्रेजी लिप्यंतरण) में प्रस्तुतीकरण होगा, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले लोग भी श्लोकों का सही उच्चारण कर सकें। प्रत्येक श्लोक का अर्थ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में भी उपलब्ध होगा।

प्रेस का कहना है कि यह संस्करण विशेष रूप से युवा पीढ़ी, दक्षिण भारत के उन पाठकों के लिए तैयार किया जा रहा है जो देवनागरी लिपि से परिचित नहीं हैं, और विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों के बच्चों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को सरल और आधुनिक तरीके से भगवद् गीता के ज्ञान से जोड़ना है।

पुस्तक को उच्च गुणवत्ता वाले आर्ट पेपर पर प्रकाशित किया जाएगा। इसमें श्लोकों के संदर्भ से जुड़े आकर्षक चित्र भी शामिल होंगे, जिससे पाठकों के लिए अध्ययन अधिक रोचक और सहज बन सके।

गीता प्रेस के अनुसार, इस विशेष संस्करण की प्रकाशन प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, पुस्तक की कीमत अभी तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि यह संस्करण देश-विदेश के पाठकों के बीच गीता अध्ययन को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

Author: JAN TV Editorial Team

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