बागवानों के अनुसार, मौसम की मार उस समय पड़ी जब सेब के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया चल रही थी। इस महत्वपूर्ण चरण में बारिश, ओलावृष्टि और ठंडी हवाओं ने फूलों और शुरुआती फलों को नुकसान पहुंचाया, जिससे उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ा। किसानों का कहना है कि कई बागों में फसल लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गई है।
सेब उत्पादकों का कहना है कि इस साल मौसम बिल्कुल भी अनुकूल नहीं रहा। समय पर न बारिश हुई, न बर्फबारी हुई और फ्लावरिंग के दौरान कोल्ड वेव ने फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। कई किसानों का कहना है कि इस बार उन्हें अपनी लागत निकलने की भी उम्मीद नहीं है।
बढ़ती खेती लागत ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दवाइयों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन घटने से आय पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेती करना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और महंगा हो गया है।
हालांकि, राज्य का बागवानी विभाग बदलती जलवायु परिस्थितियों से निपटने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग उच्च गुणवत्ता वाले 'फेदर्ड प्लांट्स' (शाखाओं वाले पौधों) की उपलब्धता बढ़ा रहा है, जो बदलते मौसम में बेहतर प्रदर्शन करने और अधिक उत्पादन देने में सक्षम माने जाते हैं। विभाग के अनुसार, करसोग सहित कई नर्सरियों में बड़ी संख्या में ऐसे पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें दिसंबर के बाद किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सेब की खेती का महत्वपूर्ण योगदान है और लाखों परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर करती है। ऐसे में मौसम में लगातार बढ़ रही अनिश्चितता न केवल किसानों की आय के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि राज्य के बागवानी क्षेत्र के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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