ताजमहल परिसर में मंदिर दावे पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और ASI से मांगा जवाब
(UTTARPRADESH, India) ताजमहल परिसर में कथित रूप से 'अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय' मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब तलब किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को इस मामले में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका 3 जुलाई को अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर, हरि शंकर जैन और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि ताजमहल परिसर के भीतर उक्त मंदिर मौजूद है और इस संबंध में उचित जांच और न्यायिक घोषणा की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता हरि शंकर जैन ने अदालत को बताया कि विवादित परिसर की फोटोग्राफी और सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की उनकी मांग को ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद दाखिल पुनरीक्षण याचिका भी सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दी गई, जबकि विवाद के निपटारे के लिए सर्वेक्षण आवश्यक है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, याचिका में प्रतिवादी बनाए गए पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी किया गया है।

यह याचिका आगरा की जिला अदालत के उन आदेशों को चुनौती देती है, जिनमें सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और अतिरिक्त जिला जज ने विवादित परिसर के सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में आगरा की सिविल अदालत में एक वाद दायर किया गया था, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि ताजमहल परिसर के भीतर अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर मौजूद है। यह मूल वाद अभी भी अदालत में लंबित है। इसी लंबित मामले के दौरान सर्वेक्षण की मांग वाली अर्जी खारिज होने के बाद अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल केंद्र सरकार और एएसआई से अपना पक्ष रखने के लिए जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

Author: JAN TV Editorial Team

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