इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन से संचालित ट्रेनें परिचालन में हैं। यह ट्रेन 89 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में तय करेगी और रास्ते में 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है और भारत की तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते प्राप्त करता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से यह क्षेत्र संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। इसके बावजूद देश के विकास और भारतीय रेलवे की गति प्रभावित नहीं हुई।
हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक से संचालित यह ट्रेन 10 कोच वाली है और लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखती है। इसका 3,200 हॉर्सपावर (HP) और 1,200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रोपल्शन सिस्टम इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करता है।
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह संचालन के दौरान शून्य कार्बन उत्सर्जन (Zero Carbon Emissions) करती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प (Water Vapour) छोड़ती है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में कम शोर करती है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाती है और बिना ओवरहेड विद्युतीकरण के भी संचालित हो सकती है। हरित हाइड्रोजन के उपयोग से तापीय बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम होगी और भारत के स्वच्छ एवं सतत परिवहन मिशन को नई गति मिलेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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