जानकारी के अनुसार, गुरुवार 13 अगस्त की शाम पीपलकोटी के मायापुर में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी का रिसाव बढ़ा और इसके साथ मलबा भी अंदर आ गया। पानी और मलबे के तेज बहाव की वजह से वहां काम कर रहे मजदूरों को मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा।घटना के बाद तत्काल राहत एवं बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। सुरंग के भीतर पानी का स्तर और मलबा बढ़ने से बचावकर्मियों के लिए अंदर तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए NDRF और SDRF के साथ ITBP तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें अभियान में लगी हुई हैं। बचाव दल लगातार सुरंग के अंदर पहुंच बनाने और फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बढ़ते पानी और मलबे के कारण रेस्क्यू की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने सुरंग के अंदर जाकर मौके की स्थिति देखी। इसके बाद उनके गोपेश्वर जिला अस्पताल पहुंचकर घायल मजदूरों से मिलने की जानकारी सामने आई है
हादसे में प्रभावित मजदूरों में कई राज्यों के लोग शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के मजदूर घायल हुए हैं। वहीं मृतकों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मजदूर शामिल बताए गए हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे मजदूरों तक सुरक्षित पहुंच बनाना और उन्हें बाहर निकालना है। रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि पानी और मलबे को नियंत्रित करते हुए अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।चमोली जैसे पहाड़ी इलाकों में सुरंग और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल चमोली के पीपलकोटी में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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