मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पर्यटन विभाग अगस्त के अंतिम सप्ताह में कॉरिडोर निर्माण की संभावनाओं को लेकर व्यापक सर्वे शुरू करेगा। इस पहल का उद्देश्य गंगा किनारे स्थित धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को एकीकृत कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना है।
जिले की स्याना, अनूपशहर और डिबाई तहसीलों से होकर लगभग 65 किलोमीटर तक गंगा नदी प्रवाहित होती है। इस पूरे क्षेत्र में महाभारतकालीन, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के अनेक धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था का केंद्र रहे हैं। अब इन सभी स्थलों को एक श्रृंखला के रूप में विकसित कर पर्यटन कॉरिडोर का स्वरूप दिया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे वर्षों से चल रहे जनजागरण अभियान की भी बड़ी भूमिका रही है। धार्मिक स्थलों की श्रृंखला को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के लिए 12 मार्च 2023 से शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप ले चुका था। लगातार उठती मांग और जनसमर्थन के बाद सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।
अभियान का प्रभाव पहले भी देखने को मिला है। अब तक इस धार्मिक श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में लगभग 100 करोड़ रुपये सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। वहीं करीब 20 करोड़ रुपये विभिन्न धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर लगाए गए हैं। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरिडोर बनने के बाद धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही गंगा तटीय क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन विभाग द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव के आधार पर आगामी चरणों में कॉरिडोर निर्माण, सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में व्यापक कार्य किए जाएंगे। इससे क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है।
Author: JAN TV Editorial Team
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