(Varanasi, Varanasi)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी से **9वें राष्ट्रीय पोषण माह** का शुभारंभ किया। 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान का फोकस गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल पर रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी व्यवस्था में पिछले वर्षों में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले बच्चों के पोषाहार की आपूर्ति व्यवस्था में शराब माफिया से जुड़े लोगों का दखल था और कई बार तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उस समय केंद्रों पर पेयजल, शौचालय और गर्म भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद पोषाहार वितरण व्यवस्था में बदलाव कर इसे अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया। उन्होंने कहा कि अब आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण सेवाओं तक सीमित न रखकर बच्चों के शुरुआती विकास और प्रारंभिक शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों **‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥’** का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें कोई व्यक्ति गरीब, दुखी, कमजोर या दीन-हीन न रहे।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के अनुरूप केंद्र और प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वस्थ और सक्षम बच्चों से ही आगे चलकर कुशल युवा तैयार होंगे, जो देश के विकास और आत्मनिर्भरता में योगदान देंगे।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर स्थिति में थे। सरकार बनने के बाद इन केंद्रों की स्थिति की समीक्षा कर मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर काम शुरू किया गया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले साढ़े नौ वर्षों में **70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प** किया जा चुका है। नए मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ बाउंड्रीवॉल, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। एक केंद्र के निर्माण या रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम **‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’** रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं होनी चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और स्थानीय नागरिकों को भी इन केंद्रों की व्यवस्था और गतिविधियों में अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने पोषण माह के दौरान आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील, सामुदायिक भागीदारी, प्रारंभिक बाल शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के भोजन में पोषण के साथ स्वाद और विविधता को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भोजन को बच्चों के लिए रुचिकर बनाया जाए, ताकि वे खुशी से पौष्टिक आहार ग्रहण करें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र** स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हर महीने करीब **1.56 करोड़ लाभार्थियों** तक पोषण सेवाएं पहुंचाने का दावा किया गया।
वहीं करीब **35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील** उपलब्ध कराया जा रहा है। लगभग 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी किए जाने की भी जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती 1,000 दिनों को विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया।
टेक-होम राशन (THR) व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की नई पोषण गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार लागू किया गया है।
प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित होने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस व्यवस्था से 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।
पोषाहार के परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए GPS ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। वहीं पैकेट पर QR कोड के जरिए डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से अक्षर एवं अंकों की पहचान कराई जा रही है।
उन्होंने कानपुर के एक आंगनवाड़ी केंद्र का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां बच्चों को गीत और खेल के माध्यम से संख्या ज्ञान कराया जा रहा था। उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से बच्चे सहज तरीके से सीखते हैं और पढ़ाई उनके लिए बोझ नहीं बनती।
योगी ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर विकसित होने वाली सीखने की क्षमता आगे की शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।
मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 1.60 करोड़ बच्चों** को हर वर्ष दो-दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि अब बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भी दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था अनिवार्य की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें स्कूल में बेहतर और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि **ऑपरेशन कायाकल्प** के तहत 1.36 लाख विद्यालयों में भवन और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर किया गया है। स्कूलों में पेयजल, अलग-अलग शौचालय और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण पहले कई बच्चे, खासतौर पर बालिकाएं, पढ़ाई बीच में छोड़ देती थीं। सुविधाओं में सुधार के साथ इस स्थिति को बदलने के प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आंगनवाड़ी स्तर पर अक्षर और अंक ज्ञान के बाद बच्चों की सीखने की क्षमता को **निपुण भारत अभियान** के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने के प्रयास को पांचवीं कक्षा तक विस्तार देने की भी बात कही गई।
माध्यमिक शिक्षा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने **प्रोजेक्ट अलंकार** के तहत पुराने सरकारी और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में किए जा रहे सुधार कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 2,100 इंटर कॉलेजों के पुनरुद्धार के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
इन संस्थानों में स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, बेहतर फर्नीचर जैसी सुविधाओं के साथ विद्यार्थियों को अटल टिंकरिंग लैब और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी से शुरू होने वाली शिक्षा की यात्रा बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से होते हुए कौशल विकास और रोजगार तक जाती है। इस पूरी व्यवस्था को आपस में जोड़ना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने **प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना** को पोषण अभियान का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि गर्भवती और धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता देना भी महत्वपूर्ण है।
सीएम के अनुसार, देश में अब तक करीब पांच करोड़ माताओं को इस योजना के तहत 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि मां के स्वास्थ्य में किया गया निवेश बच्चे के भविष्य को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के शुरुआती विकास में उनकी जिम्मेदारी बेहद अहम है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को करीब तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर **12 हजार रुपये** किया है।
सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाकर छह हजार रुपये किए जाने तथा आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवारों को **पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर** उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
करीब 1.56 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाने और शेष को भी स्मार्टफोन देने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे केंद्रों की गतिविधियों का रियल टाइम डेटा उपलब्ध हो रहा है और निगरानी व्यवस्था मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के बच्चों और युवाओं की क्षमता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। स्वस्थ बचपन, बेहतर पोषण और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा से ही भविष्य के कुशल युवाओं की नींव रखी जा सकती है।
उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों को केवल सरकारी संस्थान न मानकर राष्ट्र निर्माण के शुरुआती केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ आगे बढ़ाने से आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक तैयार किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री **अन्नपूर्णा देवी**, केंद्रीय राज्य मंत्री **सावित्री ठाकुर**, उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री **बेबी रानी मौर्य**, मंत्री **अनिल राजभर**, मंत्री **रविंद्र जायसवाल**, मंत्री **दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’**, राज्य मंत्री **प्रतिभा शुक्ला**, राज्य मंत्री **हंसराज विश्वकर्मा** सहित केंद्र और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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