(Lucknow, Lucknow)
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 में प्रदेश की आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही तकनीकों की झलक देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले UPITS के चौथे संस्करण में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में पवेलियन लगाया गया है। यहां तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी छात्रों, प्रतिष्ठित संस्थानों के संकाय सदस्यों, छात्रों और आमजन को विभाग की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और पिछले एक दशक की उपलब्धियों से परिचित कराया जाएगा।
प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग के अनुसार, पवेलियन में लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के जरिए प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की कार्यप्रणाली दिखाई जाएगी। इनमें बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना और सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। नहर नेटवर्क और लिफ्ट कैनाल के कार्यात्मक मॉडल के साथ बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया जाएगा। विभाग के अनुसार पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ, जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार या पुनर्स्थापन हुआ और 44.81 लाख किसान परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।
पवेलियन में स्मार्ट सिंचाई प्रणाली भी प्रमुख आकर्षण होगी। मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह के अनुसार सिंचाई जल के वितरण, नहर संचालन और सरकारी नलकूपों के संचालन में SCADA, AI और IoT जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर SCADA सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली के जरिए दूरदराज के बैराजों, सरकारी नलकूपों और पंप नहरों की निगरानी और नियंत्रण भी किया जा रहा है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, संवेदनशील स्थानों की निगरानी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकें शामिल हैं। विभाग के अनुसार गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फ्लड प्लेन जोनिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। साथ ही प्रदेश में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का कार्य किया गया है, जिससे नदी के प्रवाह को सुचारु बनाने और तटबंधों पर बाढ़ के दबाव को कम करने के प्रयास किए गए हैं।
कम पानी वाले क्षेत्रों में जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हमीरपुर, महोबा और ललितपुर की स्प्रिंकलर परियोजनाओं के साथ सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में विकसित सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियों को भी प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा। विभाग के अनुसार इन प्रणालियों से करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिला है।
उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं, मुख्य नहर प्रणालियों के उपकरणों एवं सेंसरों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की दिशा में भी काम कर रहा है। नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा नहरों की सिल्ट सफाई और अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रमुखता से दिखाई जाएगी। विभाग के अनुसार नहरों की सिल्ट सफाई 27,551 किलोमीटर से बढ़कर 55,320 किलोमीटर हुई है, जबकि कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हो गया है।
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