2017 से पहले 76 स्थानों तक सीमित थी पहुंच, अब गांवों में किताब, इंटरनेट और डिजिटल कंटेंट की सुविधा
(India) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी के विस्तार को ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और तकनीक की पहुंच बढ़ाने वाला बदलाव बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब शहर की दूरी पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती। प्रदेश के 57,600 गांवों तक डिजिटल लाइब्रेरी पहुंचने से गांवों में ज्ञान का डिजिटल द्वार खुला है और संसाधन करीब आने से बच्चों और युवाओं के सपनों की राह आसान हुई है।

मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय गांव के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों और बेहतर संसाधनों के लिए शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक के खसहा मोहम्मदपुर स्थित ग्राम पंचायत सचिवालय में तैयार डिजिटल लाइब्रेरी में किताबों और आधुनिक तकनीक को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया गया है।

इस डिजिटल लाइब्रेरी में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है। इससे गांव में रहने वाले बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए पुस्तक और डिजिटल कंटेंट दोनों की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल रही है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, संसाधन करीब आने से बच्चों और युवाओं को अध्ययन, ई-लर्निंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सुविधा मिल रही है। शहर आने-जाने में लगने वाला समय और पैसा अब पढ़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के लगभग 76 स्थानों तक सीमित थी, जबकि अब डिजिटल लाइब्रेरी 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है। डिजिटल शिक्षा को स्कूलों तक सीमित न रखते हुए लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के माध्यम से शिक्षा को तकनीक से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में पिछली स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि 2012-16 के दौरान पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली। उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता और उनकी पहुंच के मामले में उत्तर प्रदेश ने लंबी दूरी तय की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत सचिवालय अब प्रशासनिक सेवाओं के साथ ज्ञान और तकनीक के केंद्र के रूप में भी नई भूमिका निभा रहे हैं। खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी को उन्होंने इस बदलाव का उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, गांवों में पढ़ाई का परिवेश बदल रहा है और ज्ञान की रोशनी बच्चों के द्वार तक पहुंच रही है।

Author: JAN TV Editorial Team

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