प्राइवेट स्कूल्स की मनमानी पर रोक के लिए शिक्षामंत्री ने की 2 महीने की भीतर रेग्यूलेटरी बोर्ड के गठन की घोषणा
(Bagidora, Banswara) बांसवाड़ा के कंठाल गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक का अलग ही रूप देखने को मिला। जिस शिक्षा के मंदिर में बच्चो को पढ़ने के लिए भेजा जाता है। उसी मंदिर में वहां मौजूद शिक्षक विद्यार्थियो से कमरे की सफाई और पौधो को पानी पिलाने का काम करवाते है। जब हमारी टीम अचनाक स्कूल में पहंुची तो देखा की गुरूजी जेब में हाथ ड़ालकर खडे है और एक छात्रा से कमरे की सफाई करवा रहे है। वहीं एक छोटा सा बच्चा कक्षा में पढ़ने के बजाय नंगे पैर ही पौधो को पानी पिला रहा है। जैसे ही गुरूजी की कैमरे पर नजर पड़ी तो उन्होने छात्रा को कमरे से बाहर निकाल दिया।

Author: JAN TV Editorial Team

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