पूर्व सीजेआई काटजू का दावा- यूपीए के शासनकाल में भ्रष्ट जज को मिलता रहा प्रमोशन
(DELHI, India) इस मसले पर सोमवार को संसद में खासा हंगामा हुआ। एक अंग्रेजी अखबार में छपे लेख में जस्टिस काटजू ने दावा किया है कि उक्त जज मद्रास हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप थे। उन्हें तमिलनाडु हाई कोर्ट में सीधे जिला जज बनाया गया था। उक्त जज के कामकाज पर मद्रास हाईकोर्ट के विभिन्न जजों ने विपरीत टिप्पणी की थी, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उस जज को मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज बना दिया गया। जस्टिस काटजू के मुताबिक, जब मैं मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बना, तब भी वह जज सेवाएं दे रहा था। जस्टिस काटजू के मुताबिक, उक्त जज को तमिलनाडु के एक बड़े राजनीतिक परिवार का समर्थन हासिल था। उसने प्रदेश के एक बड़े नेता को जमानत भी दी थी। जस्टिस काटजू ने उस भ्रष्ट जज के खिलाफ तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस आरसी लाहोटी से भी शिकायत की थी। आईबी से जांच कराने के बाद जस्टिस लाहोटी ने आरोपों को सही पाया था, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। जस्टिस काटजू ने आगे लिखा है कि बतौर अतिरिक्त जज उस जज का कार्यकाल पूरा हो रहा था। मैंने सोचा आईबी की रिपोर्ट के आधार पर अब कार्रवाई होगी, लेकिन उल्टा उसका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया। दरअसल, तत्कालीन यूपीए सरकार की शह पर ऐसा किया गया था। जस्टिस काटजू के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र सभा की बैठक में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क रवाना हो रहे थे, तभी तमिलनाडु का एक नेता उनसे मिला और उक्त जज के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का दबाव डाला था। मनमोहन सिंह को धमकी दी गई थी कि बात नहीं मानी गई तो उनके यूएन से लौटने तक यूपीए सरकार गिर जाएगी। इस पर मनमोहन सिंह घबरा गए। इस मौके पर कांग्रेस के एक बड़े नेता ने प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाया कि वह सब संभाल लेगा। बाद में वह कांग्रेसी नेता तत्कालीन सीजेआई जस्टिस लाहोटी के पास गया और बोली कि उक्त जज का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया तो सरकार पर बड़ा संकट आ जाएगा। इस पर जस्टिस लाहोटी ने केंद्र सरकार को लिखा कि उक्त जज का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए।

Author: JAN TV Editorial Team

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