(DELHI, India)
राज्यसभा ने आज राष्ट्रीय नियुक्ति आयोग विधेयक, 2014 और इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में 179 सदस्यों ने मतदान किया। एक सदस्य ने मतविभाजन में भाग नहीं लिया। विधेयकों पर विपक्ष के लाये गये संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से नकार दिया। राष्ट्रीय नियुक्ति आयोग विधेयक को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। प्रक्रिया के अनुसार संविधान संशोधन विधेयक को अब सभी राज्यों को भेजा जायेगा और राज्य विधायिकाओं में से 50 प्रतिशत से इस पर मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह प्रक्रिया आठ माह तक चल सकती है। राज्यों से मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जायेगा। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक के कानून बनने के बाद देश में न्यायाधीशों द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति करने वाली कालेजियम व्यवस्था समाप्त हो जायेगी। संविधान संशोधन विधेयक के जरिये राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जायेगा। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक के तहत उच्चतम न्यायालयों एवं देश के अन्य 24 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति की जायेगी। आयोग में भारत के प्रधान न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के दो वरिष्ठ न्यायाधीश, कानून मंत्री तथा दो प्रख्यात व्यक्ति सदस्य होंगे।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दोनों विधेयकों पर अलग अलग हुयी चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करती है और इन विधेयकों के जरिये उसकी गरिमा को कम नहीं किया जा रहा है। प्रसाद ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार ने यह काम हड़बड़ी में किया है। उन्होंने कहा कि कालेजियम व्यवस्था के खिलाफ पूर्व न्यायाधीश जे एस वर्मा, न्यायमूर्ति वेंकटचलैया टिप्पणी कर चुके हैं तथा विभिन्न आयोगों और संसद की स्थायी समितियों ने भी इसके विरूद्ध राय दी थी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।