(DELHI, India)
इस संबंध में मंगलवार को स्पीकर ने फैसला किया कि कांग्रेस को नेता विपक्ष का पद नहीं दिया जा सकता। उन्होंने इस फैसले के पीछे संसद में अब तक की परंपरा का हवाला भी दिया। उन्होंने इस फैसले के पीछे अटार्नी जनरल की राय का भी हवाला दिया। गौर हो कि भारत के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी बीते दिनों कहा था कि कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए कोरम के बराबर यानी लोकसभा में कम से कम 10 फीसदी सीटें पार्टी के पास होनी चाहिए। महाजन ने सोमवार को कहा था कि नेता विपक्ष के मामले में अध्यक्ष नियमों से बंधा है हालांकि सदन चाहे तो इस संबंध में नियम बदल सकता है। महाजन ने कहा था कि एक अध्यक्ष से सिर्फ नियमों के पालन की उम्मीद की जाती है। मुझे नियमों के अनुसार काम करना होगा। गौरतलब है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस संबंध में कहा था कि अध्यक्ष को अपने विवेक से फैसला लेना चाहिए। महाजन ने कहा कि अगर कोई इसमें बदलाव चाहता है तो मामले की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन किया जा सकता है। गौरतलब है कि लोकसभा में नेता विपक्ष के पद पर दावा करने के लिए किसी राजनीतिक दल के पास कुल सदस्य संख्या 543 का कम से कम 10 फीसदी यानी 55 का संख्याबल होना चाहिए। वर्तमान लोकसभा में दूसरे सबसे बड़े दल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या मात्र 44 है। हालांकि कांग्रेस ने चुनाव पूर्व बने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पास 56 सदस्य होने के आधार पर नेता विपक्ष के पद का दावा भी किया था। नेता विपक्ष के पद के लिए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगी थी। बता दें कि साल 1980 और 1984 में भी लोकसभा में किसी दल के पास नेता विपक्ष का पद नहीं था।
Digital Desk: Shiv Kishor
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