मोदी सरकार के 100 दिन, कुछ अच्छे फैसलों के साथ कुछ विवाद भी बने सुर्खियां
(DELHI, India) आम लोगों ने सरकार के काम पर अब तक का कार्यकाल कैसा रहा, कौन चुनौती सबसे बड़ी रही, और किस मोर्चे पर सबसे बेहतर काम किया, लोगों ने इस पर खूब जवाब दिए। ज्यादातर लोगों ने मोदी सरकार की तारीफ की। कई लोगों ने कहा की काम अच्छा था तो कई ऐसे भी थे जिनके मुताबिक अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उम्मीदें बहुत हैं और जब तक वे पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अच्छे दिन आ गए यह कहना जल्दबाजी होगी।
इन 100 दिनों में सरकार ने कई काम किए जो उम्मीदें जगाते हैं, लेकिन ऐसे काम भी किए हैं जिन्हें लेकर उसकी खासी आलोचना भी हुई। सार्क देशों को शपथ ग्रहण का न्योता देकर नई परंपरा शुरू करने वाली मोदी सरकार ने कई मोर्चों पर शुरुआती बढ़त बनाई, तो कई बार उसके जवाब पिछली यूपीए सरकार से मिलते, जुलते थे। सत्ता में आते ही बजट पेश करने की बड़ी चुनौती को बेहतर ढंग से डील किया गया। इसके बाद चले सत्र में पहले नृपेंद्र मिश्र की नियुक्ति के लिए संशोधन बिल और उसके बाद अंत में न्यायिक नियुक्ति आयोग बिल पास कराना सरकार की जीत माना गया। पीएम मोदी भी इस बीच खासे सक्रिय दिखे। अंतरिक्ष यान प्रक्षेपण हो या नौसेना के जंगी जहाजों को देश को समर्पित करना, वे आगे आए और सभी का हौसला बढ़ाया। हालांकिए बंदायू रेप मामला और यूपी में जारी सांप्रदायिक हिंसा पर वे चुप ही रहे। शपथ ग्रहण के बाद ही पड़ोसी देशों के दौरे से मोदी की अलग छवि सामने आई, तो सियाचिन जाकर उन्होंने जवानों का भी हौसला बढ़ाया। कटरा तक रेल लाइनए जम्मूण्लेह में पावर प्लांट और उसके बाद नेपाल की यात्राए जिसमें वे विशेष रूप से पशुपतिनाथ मंदिर भी गए, काफी चर्चा में रही। हालांकि, नेपाल के साथ जल विवाद सुलझाने में वे नाकाम ही रहे। इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन में भी मोदी की मौजूदगी अहम रही।
15 अगस्त पर मोदी का बिना लिखा भाषण पढ़ना, राजस्थानी पगड़ी और अंदाजे,बयां काफी पसंद किया गया। इस मौके पर पीएम ने योजना आयोग की ही प्लानिंग कर दीए तो जन-धन के रूप में मनरेगा के टक्कर की योजना शुरू करने की घोषणा भी की। कुछ मामलों को नजरअंदाज करें, तो 100 दिन की सरकार ने देश के सामने अच्छी छवि ही पेश की। देश की जनता ने भी सरकार को ए ग्रेड दिया। आने वाले समय में संभव है कि गंगा सफाई और बुलेट ट्रेन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भी जल्द नई सौगात के रूप में सामने आएं। महंगाई सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है। लोगों का कहना है की अच्छे दिन की बात करना तब बेकार हो जाएगा, जब उसका जश्न मना पाने की इजाजत ही पॉकेट न दे। पिछली सरकार के पतन में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा था। इस सरकार को भी इस मोर्चे पर तुरंत काम करना होगा,,, सुषमा ने जब से विदेश मंत्री का पद संभाला है, तब से उन्हें डिप्लोमसी के स्तर पर कई गंभीर चुनौतियों का सामना किया है, इराक से नर्सों की रिहाई से लेकर अन्य मोर्चों पर वह मजबूती से डटी रहीं। रेल मंत्री के रूप में सदानंद गौड़ा ने किराया बढ़ाने का बोल्ड फैसला लेने के साथ ही अन्य बंद प्रॉजेक्ट को पटरी पर लाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए। यात्री सुविधाओं को बढ़ाने पर फोकस किया। सड़क एवं परिवहन मंत्री के रूप में नितिन गडकरी ने 100 दिनों के अंदर बंद पड़े 50 हजार करोड़ के नैशनल हाईवे प्रॉजेक्ट को पर्यावरण सहित दूसरी बाधा से पास कराकर उसे ऐक्शन में लाने में सफलता पाई। पर्यावरण मंत्री के रूप में प्रकाश जावडेकर ने अपने मंत्रालय को लालफीताशाही से दूर करने और निवेशकों को बेवजह की तकलीफ से बचाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की। 100 से अधिक प्रॉजेक्ट को हरी झंडी दी। वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली ने देश में निवेश का माहौल सुधारने के लिए कई प्रयास किए। जीडीपी में वृद्धि हुई। पेट्रोल एक महीने में 5 रुपये तक सस्ता हुआ। आर्थिक हालात सुधरने के संकेत दिखे। गवर्नरों की नियुक्ति हो या प्राइवेट सेक्रेटरी रखने का मुद्दाए होम मिनिस्टर के रूप में राजनाथ विवाद में पड़े। बेटे पंकज सिंह के बारे में अफवाह पर बयान देकर उन्होंने इसे राजनीतिक विवाद में तब्दील कर दिया। अपनी डिग्री का मसला हो या डीयू में 4 साल के कोर्स का, स्मृति ईरानी पहले दिन से विवादों में हैं। इत्तेफाक से 100 दिन पूरे होने पर भी वह शिक्षक दिवस पर पीएम के भाषण के प्रसारण को लेकर विवादों में रहीं।

Digital Desk: Shiv Kishor

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