प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- जो पीढियों के बारे में सोचते हैं, वो इंसान बोते हैं
(DELHI, India) मोदी ने छात्रों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इस बात पर हैरानी जताई कि अच्छे छात्र शिक्षक क्यों नहीं बनना चाहते हैं। दिल्‍ली के मानेकशा ऑडिटोरियम में मोदी ने कहा कि स्‍टूडेंट्स को संबोधित करना मेरे लिए सौभाग्‍य की बात है। आज सारी दुनिया में अच्‍छे टीचर्स की मांग है। उन्‍होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन में शिक्षकों का बड़ा योगदान रहा है। जो पीढि़यों के बारे में सोचते हैं, वो इंसान बोते हैं। गांवों में एक समय सबसे आदरणीय शिक्षक हुआ करते थे। टीचर्स से बच्‍चों का अपनापन होता है। हमारे देश के बच्‍चों में आगे बढ़ने का काफी सामर्थ्‍य है। उन्‍होंने कहा कि आज देश में एक माहौल बनना चाहिए और इसके लिए मुझे हर स्‍कूल से मदद चाहिए। शिक्षकों को तकनीकी पर जोर देना चाहिए। छात्रों को तकनीकी से दूर रखना गुनाह है। बच्‍चों के लिए खेल कूद जरूरी है। खेल कूद के बिना जीवन खिलता नहीं है। छात्रों को टीवी की दुनिया से बाहर आना चाहिए। किताबों, टीवी के दायरे से बाहर भी जीवन है। पीएम ने कहा कि जिंदगी में परिस्थितियां किसी को रोक नहीं सकती है। जीवन में मस्‍ती भी होनी चाहिए। बच्‍चों को जीवन चरित्र पढ़ाना चाहिए। सिर्फ गूगल गुरु के भरोसे नहीं रहना चाहिए। दिल्‍ली के मानेकशा ऑडिटोरियम में मोदी के संबोधन को सुनने के लिए सरकारी स्कूलों के 600 तथा केंद्रीय विद्यालयों के 100 छात्र-छात्रा मौजूद रहे। वहीं, देश भर के स्‍कूलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये छात्र और छात्राओं ने प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना। देश के 18 लाख सरकारी और प्राइवेट स्‍कूलों में प्रधानमंत्री के इस संबोधन का सीधा प्रसारण हुआ।

Digital Desk: Shiv Kishor

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