मुख्य सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का सवाल उठाते हुये न्यायालय ने कहा कि इससे पक्षपात और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिलता है। न्यायालय ने जानना चाहा कि इन पदों के लिये सिर्फ नौकरशाहों का ही चयन क्यों होता है, आम आदमी का क्यों नहीं। प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया तो निष्पक्षता की निशानी होनी चाहिए और मौजूदा व्यवस्था की आलोचना हो रही है क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव है। न्यायाधीशों ने कहा कि कोई भी व्यवस्था जिसमें चयन के लिये आंतरिक प्रक्रिया अपनायी जाती है उसकी पारदर्शिता के अभाव के लिये जनता आलोचना करती है। न्यायलय ने कहा कि देश में प्रतिभा का भंडार है और लोग पारदर्शिता चाहते हैं। आप क्यों ऐसी प्रक्रिया अपनाते हैं जिससे उन लोगों को मौका नहीं मिलता जो प्रतिभाशाली हैं। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि जनता से आवेदन नहीं आमंत्रित किये जा सकते क्योंकि अधिकांश लोग इस पद के लिये आवेदन करने की बजाय केन्द्र द्वारा विचार करने को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक महीना लगेगा। उन्होंने न्यायालय को भरोसा दिलाया कि इस मामले के शीर्ष अदालत में लंबित होने के दौरान नियुक्ति के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
Digital Desk: Shiv Kishor
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।