थरूर ने कहा, ‘मुझे याद पड़ता है कि जब मैं दिल्ली में एक कॉलेज में था तो जूनियर डॉक्टरों की बड़ी हड़ताल हुई थी और कर्ण सिंह स्वास्थ्य मंत्री थे। कुछ हफ्तों तक वह प्रदर्शनकारियों से मिले ही नहीं और उनकी शिकायतों पर कोई जवाब नहीं दिया। पूरे परिसर में पोस्टर लग गये जिनमें लिखा था, ‘कर्ण बनिये, कुंभकरण नहीं। यह 1974 में सीधी तौर पर महाभारत से लिया गया था।’ इस चर्चित पुस्तक में आधुनिक भारतीय इतिहास को दोहराया गया है और इसमें कुछ प्रख्यात राजनीतिक हस्तियां महाभारत के पात्रों के समान लगने लगती हैं। थरूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह रामायण से विपरीत है, जहां आपके पास भगवान जैसे चरित्र हैं जो स्पष्ट कहा जाये तो असंभव तरीके से बर्ताव करते हैं। महाभारत में स्वाभाविक तौर पर वास्तविक मानवीय चरित्र हैं। इन लोगों में विभिन्न मत, वासना, विश्वासघात, कपट, प्रेम एवं राजनीति मिलती है तथा इसमें भगवद्गीता भी है जो एक धर्मनिरपेक्ष महाकाव्य है
Digital Desk: Shiv Kishor
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