ऐसे में इस झील के रहस्य को सुलझाने के लिए समय-समय पर कई प्रयास हुए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। शुरुआत में इसे संयोग मात्र कहकर टाल दिया जाता था, लेकिन हर बार इस तरह की बातें सामने आने लगी, ऐसे में जांचकर्ता भी सतर्क हो गए और झील से किसी भी तरह की छेड़खानी करने से कतराने लगे।
इस झील की सच्चाई जानने की आखिरी कोशिश 1946 में एंडी लेविन ने की थी। वह झील तक पहुंचा और पानी के साथ वहां के पौधों को लेकर चल दिया, लेकिन वह रास्ता भटक गया। ऐसा कई बार हुआ, ऐसे में उसने पानी और पौधों को फेंक दिया, तब जाकर उसे सही रास्ता दिखाई दिया। लेकिन, 1 सप्ताह बाद ही उसकी मौत हो गई।
इस झील के बारे में एक किवदंती भी प्रचलित है, जिसके अनुसार इस झील की रक्षा पहाड़ों पर रहने वाला एक अजगर करता है। इस कारण से वहां रहने वाले वेंदा आदिवासी हर साल नृत्य का आयोजन करते हैं। उनके अनुसार, झील का भराव और इसका रंग उन्हें अपने पूर्वजों के गुस्से और आने वाली बरसात के बारे में बताता है। हालांकि, इस झील की सच्चाई क्या है, यह आज भी रहस्य है।
Author: JAN TV Editorial Team
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