(MAHARASHTRA, India)
वहीं, शिवसेना ने मंगलवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना में छपे एक आलेख में शिवसेना ने चाचा-भतीजा (शरद पवार और अजित पवार) और एनसीपी पर जमकर वार किया है। इसमें कहा गया है कि एनसीपी का बीजेपी को समर्थन का प्रस्ताव केवल भ्रष्ट नेताओं को बचाने के लिए दिया गया है। साथ ही, इसमें बीजेपी पर कोई निशाना नहीं साधा गया है। इससे यह संकेत मिलते हैं कि बीजेपी-शिवसेना में कुछ खिचड़ी पक सकती है। सामना में एनसीपी को आड़े हाथ लेते हुए शिवसेना ने एनसीपी को मौकापरस्त बताया है। आलेख में शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल पर प्रहार करते हुए उन्हें एक ऐसा मौकापरस्त बताया गया है जो केवल मतलबपरस्ती का शिकार हैं। 'सामना' में खिल्ली उडाते हुए कहा गया है कि महाराष्ट्र की जमीन साधु संतों की रही है लेकिन वर्तमान में ये जमीन मतलबपरस्तों की बनकर रह गई है। अगर ऐसा नहीं होता तो अचानक ही पलटी मारकर एनसीपी भारतीय जनता पार्टी को बिना किसी शर्त के समर्थन देने के लिए अचानक कहां से आ गई जबकि चुनाव के ठीक एक दिन पहले एकनाथ खडसे ने सार्वजनिक सभा में कहा था कि कुछ भी हो जाए बीजेपी किसी भी हाल में एनसीपी का सर्मथन नही लेगी। 'सामना' में एनसीपी की खिंचाई करते हुए कहा गया कि प्रफुल्ल पटेल को महाराष्ट्र की चिंता कब से सताने लगी जो दल विरोघी दल का नेता पद पाने लायक भी नही बचा है और जिस पार्टी के लोगों पर भ्रष्टाचार के और घोटालों के कई आरोप लगे हैं वो कोई नया नहीं है। वहीं, शरद पवार की भी खिल्ली उड़ाते हुए कहा गया है कि कल तक जो एनसीपी, बीजेपी को भयंकर साम्प्रदायिक औऱ हाफ चड्डीवाला कहकर चिढाता था उसे आज अचानक क्या हुआ है। प्रचार के दौरान शरद पवार ने हाफ चढढीवालों का जमकर मजाक उडाया था आज उसी के पीछे इतना प्रेंम क्यों जाग्रत हुआ है।
वहीं, आलेख में भारतीय जनता पार्टी को चेताया है कि पटेल और पवार जो प्रेम का चंदन इस वक्त घिस रहे हैं उससे बीजेपी सावधान रहे। वो महाराष्ट्र के हित के बारे में नही सोच रहे बल्कि उनके जो भ्रष्टाचार के मामले हैं उन्हे दबाने के लिए अपनी पुरी कोशिश कर बीजेपी का दामन थामना चाह रहे हैं। प्रघानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान कई बार काका भतीजे ने महाराष्ट्र को कैसे लूटा, ये बता चुके हैं और साथ ही साथ नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की जगह नेचरल करप्ट पार्टी की उपाधि दी।
Author: JAN TV Editorial Team
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