600 साल पुराना मंदिर, हर तरफ दिखते हैं अनोखे खंभे
(India) यह मंदिर 40,000 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्र में फैला है। इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महान शासक राणा कुंभा के समय में 15वीं शताब्दी में हुआ था।
1400 से अधिक खंभे फिर भी कोने-कोने से दिखता है मुख्य पवित्र स्थल
मंदिर के सैकड़ों खंभे इसकी प्रमुख विशेषता हैं। 1400 से अधिक खंभों वाले इस मंदिर के किसी भी कोने में खड़े हो जाइये आपको मुख्य पवित्र स्थल स्पष्ट दिखाई देगा। इन खंभों पर सुंदर नक्काशी भी की गई है। हर खंभे पर की गई नक्काशी सभी को एक-दूसरे से अलग करती है। मंदिर परिसर में 650 साल पुराने पेड़ भी मौजूद हैं।
चारो दिशाओं में खुलते हैं इस मंदिर के द्वार
इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए चार द्वार हैं जो चारों दिशाओं में खुलते हैं। इन सभी को बहुत ही कलात्मक तरीके से तराशा गया है। मंदिर में स्थापित तीर्थंकर आदिनाथ की 72 मीटर ऊंची संगमरमर की चार विशाल मूर्तियों की सुंदरता देखते ही बनती है। इनका मुख चतुर्मुख है, इसलिए इस मंदिर को चतुर्मुखी जैन मंदिर भी कहा जाता है।
29 विशाल कमरे हैं इस मंदिर में
मुख्‍य मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित चौमुख मंदिर है। संगमरमर से बने इस खूबसूरत मंदिर में 29 विशाल कमरे हैं। मंदिर के पास के गलियारे में बने मंडपों में सभी 24 तीर्थंकरों की तस्‍वारें उकेरी गई हैं। सभी मंडपों में शिखर हैं और शिखर के ऊपर घंटी लगी है। हवा चलने पर इन घंटियों की आवाज पूरे मंदिर में गूंजती है। इस मंदिर के बीचो-बीच लगे दो घंटियों का वजन 108 किलो है।
मंदिर के नीचे बने हैं तहखाने
मंदिर में 76 छोटे गुंबदनुमा पवित्र स्थान, चार बड़े प्रार्थना कक्ष तथा चार बड़े पूजन स्थल हैं। मंदिर के निर्माताओं ने जहां कलात्मक दो मंजिला भवन का निर्माण किया। वहीं, भविष्य में किसी संकट का अनुमान लगाते हुए कई तहखाने भी बनाए हैं। इन तहखानों में पवित्र मूर्तियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। ये तहखाने मंदिर के निर्माताओं की निर्माण संबंधी दूरदर्शिता का परिचय देते हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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