महाराष्ट्र: कांग्रेस-शिव सेना ने विश्वासमत खारिज किया, राज्यपाल की गाड़ी रोक की नारेबाजी
(Mumbai, Mumbai) शिवसेना और कांग्रेस के विधायकों ने राज्यपाल की गाड़ी का घेराव कर राज्यपाल वापस जाओ के नारे लगाए। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने राज्यपाल चिरंजीवी विद्यासागर राव को पत्र लिख कर आग्रह किया था कि वह सदन में अभिभाषण नहीं करें। शिव सेना और कांग्रेस ने सदन में भाजपा के ध्वनिमत से बहुमत सिद्ध करने की बात को नहीं माना और दोनों ही पार्टी के नेताओं ने इसका विरोध किया। हालांकि थोड़ी देर बाद राज्यपाल सदन में भाषण देने के लिए चले गये। सदन में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कुछ अन्य सदस्य उपस्थित थे, जबकि सदन के बाहर कांग्रेस और शिव सेना के विधायक नारेबाजी कर रहे थे। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने महाराष्ट्र विधान सभा में कहा कि कांग्रेस ध्वनिमत से बहुमत सिद्ध करने का विरोध करने के साथ ही मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस के इस्तीफे की मांग करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विधानसभा अध्यक्ष हरीभाऊ बागडे से मतदान के जरिए बहुमत सिद्ध करने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने विपक्षी दलों के बात को स्वीकार नहीं करते हुए और बहुमत सिद्ध करने की परंपरा को तोड़ते हुए ध्वनिमत से सरकार के पक्ष में बहुमत सिद्ध कर दिया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने कहा कि भाजपा सरकार बहुमत सिद्ध नहीं कर सकी है। ध्वनिमत से बहुमत सिद्ध करना कानून के खिलाफ है। ठाकरे ने कहा कि केन्द्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी अपना विश्वास प्रस्ताव रखा था उस समय सिर्फ एक मत से उनकी सरकार गिर गई थी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा सरकार सभी नियमों और राज्यपाल चिरंजीवी विद्यासागर राव के आदेश का भी उल्लंघन किया है। कांग्रेस के विधायक राज्यपाल से मिल कर भाजपा को दोबारा मतदान के जरिए बहुमत सिद्ध करने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नियम के विरूद्ध जो काम किया है, उसे पूरे देश के लोगों ने देखा है और आज सदन में पहले ही दिन भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है। देवेन्द्र फडनवीस की सरकार आज सदन में बहुमत सिद्ध नहीं कर सकी और यह सरकार अभी भी अल्पमत में है।
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि भाजपा ने गैर कानूनी ढंग से बहुमत सिद्ध किया है जिसे हम मान्य नहीं करेंगे। शिंदे ने कहा, अध्यक्ष से पहले ही मतदान के जरिए बहुमत सिद्ध करने की मांग की गई थी, लेकिन उन्होंने हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया।

Digital Desk: Shiv Kishor

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