(India)
मोदी ने कहा कि आतंकवाद का जवाब देने के लिए सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन की ओर से जारी ट्वीट के अनुसार, मोदी ने पूर्वी एशिया सम्मेलन (ईएएस) के दौरान अपने अभिभाषण में कहा कि भारत इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह के खिलाफ ईएएस के घोषणापत्र का स्वागत करता है। मोदी ने कहा कि आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौतियां बढ़ गई हैं और देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संपर्क और समृद्धि का स्रोत साइबर और अंतरिक्ष, नए संघर्ष का मंच न बन जाए। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानक दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, आंतरिक-आत्मनिर्भरता और वैश्वीकरण के युग में अंतरराष्ट्रीय कानून एवं मानकों को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इबोला वायरस के संक्रमण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसने महामारी की रोकथाम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दर्शाया है। मोदी ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि भारत ने इबोला के खिलाफ 1.2 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है। दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों तक भारत की पहुंच को लेकर मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने प्राथमिकता और तेजी के साथ पूरब की ओर देखो नीति को एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया है। पूर्वी एशिया सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, एशिया-प्रशांत और विश्व में शांति, स्थायित्व और समृद्धि के लिए कोई और मंच इतना महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि विभिन्न देश ऊर्जा साझेदारी उदाहरण स्वरूप सौर ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी के क्षेत्र में बड़ी पहल कर सकते हैं। मोदी ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की सफलता एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सीमा एकीकरण के लिए प्रेरणादायी है
Digital Desk: Shiv Kishor
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