(DELHI, India)
महाजन ने कहा, ‘सदन के नियम आप लोगों के बनाए हुए हैं। ये सदन आपका अपना है। इसके कुछ तो मायने रखिए।’ उन्होंने कहा कि अब तो विरोध जताने के लिए सदस्य अनुचित तरीकों और व्यंगात्मक टिप्पणी के साथ ही अमर्यादित भाषा का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने सदस्यों को परोक्ष चेतावनी देते हुए एक कहानी का संदर्भ दिया और कहा कि डांटने ,फटकारने और दुत्कारने वाली मां बच्चों को अच्छी नहीं लगती है लेकिन समय पर यदि नहीं डांटा जाए तो ऐसे बच्चे बाद में मां का ही कान काटते हैं और कहते हैं कि मां आपने पहले क्यों नहीं समझाया था। कल के हंगामे और तृणमूल कांग्रेस सदस्यों द्वारा नारे लिखे छाते खोलकर आसन के समक्ष आने की घटना का जिक्र करते हुए अध्यक्ष ने कहा, ‘इस अनुचित आचरण का मैं कड़ा विरोध करती हूं। ’ बीच में तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंधोपाध्याय ने कहा कि पिछली लोकसभा में भी तो तत्कालीन विपक्ष हंगामा और सदन को बाधित करता रहा था। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि बीती बातों में ना जाएं और संसद की मार्यादा को बनाए रखने के लिए काम करें। तृणमूल की ही एक अन्य सदस्य ने टिप्पणी की ‘आपसे (भाजपा) से सीखा, आप हमारे गुरू हैं।’ लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘ मैं शिष्टाचार के मानदंडों की ओर सदस्यों का ध्यान ले जाना चाहती हूं।’ उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के कुछ नियम हैं जिनमें नियम 349 के उपबंध 11 और 16 पर सदस्यों ने भी ध्यान दिया होगा। ’’ महाजन ने कहा कि नियमों के तहत सदस्य नारेबाजी नहीं कर सकते और न ही प्लेकार्ड , बैनर आदि दिखा सकते हैं।
Digital Desk: Shiv Kishor
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