(DELHI, India)
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आस्ट्रेलिया के सिडनी में 17 लोगों को बंधक बनाये जाने और पाकिस्तान में 132 मासूम बच्चों एवं नौ अन्य व्यक्तियों की निर्दयता से हत्या कर दिये जाने की घटना के बारे में लोकसभा में दिए बयान में कहा, ‘‘हताशा से भरी ये दोनों घटनाएं हमें आतंकवाद का काला चेहरा दिखाती हैं। इन दोनों घटनाओं को मिलाकर देखा जाये तो यह मानवता में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए एक पुकार है कि वे मिलकर आतंकवाद का समूल नाश करें। भारत इस विश्वव्यापी मुहिम में अपनी भूमिका अदा करने के लिए सदा तैयार है।’ उन्होंने कहा, ‘सिडनी में हुई आतंकी घटना विश्व में कहीं भी हो रहे आतंकवाद के खतरे के प्रति सरकारों, समाज और व्यक्तियों के लिए एक चेतावनी है। हम स्वयं वर्ष 2001 में हमारे लोकतंत्र के इस मंदिर, संसद पर हुए आतंकवादी हमले के शिकार रहे हैं। हमारी सरकार सभी प्रकार के आतंकवाद से लड़ने के लिए दृढ प्रतिज्ञ है जिससे हम शांतिपूर्ण और समरस समाज में रहते हुए उन्नति कर सकें।’ विदेश मंत्री ने कहा कि सिडनी में हुई घटना की गूंज थमी भी नहीं थी कि हमारे पश्चिम में पेशावर में हाल के दिनों का सबसे विभत्स कत्लेआम देखने को मिला। इस अपराध का विकराल स्वरूप इस कायराना कत्लेआम से पता चलता है, जिसमें कल 132 मासूम स्कूली बच्चों और नौ अन्य लोगों की निर्दयता के साथ हत्या कर दी गई। सुषमा ने कहा कि हमारी सरकार ने तुरंत कड़े शब्दों में पेशावर के आतंकवादी हमले की निंदा की। संकट के इस समय में हमने सीमाओं और विवादों से उपर उठकर शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और उन तक अपनी संवेदना पहुंचायी। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देर रात स्वंय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बात की और उन्हें बताया कि भारत के लोग इस हदयविदारक घड़ी में पाकिस्तान के लोगों और शोक संतप्त परिवारों के दर्द और उनके अवसाद में बराबर के साझीदार है और संकट के इस समय में उनके साथ एकजुटता के साथ खड़े हैं। उन्होंने सिडनी की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि हथियारों से लैस एक व्यक्ति ने एक कैफे में 17 लोगों को बंधक बना लिया। बंधकों में दो युवा भारतीय आईटी प्रोफेशनल पुष्पेन्दु घोष और विश्वकांत अंकिरेड्डी शामिल थे। ये वहां इंफोसिस के लिए वेस्टपैक बैंक के एक प्रोजेक्ट पर काम करते हैं जो इस कैफे के नजदीक है। घोष भारतीय नागरिक हैं और श्री अंकिरेड्डी भारतीय मूल के आस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन दोनों की सुरक्षा के लिए आस्ट्रलिया की सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में थी। प्रधानमंत्री खुद पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए थे और लगातार निगरानी कर रहे थे। विदेश मंत्री ने कहा कि बंधक संकट 14 घंटे बाद 16 दिसम्बर को स्थानीय समय के अनुसार तड़के दो बजे समाप्त हुआ और दोनों भारतीयों को सकुशल बचा लिया गया। उन्होंने कहा, ‘हम संकट की इस घड़ी में उनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह घटना प्रकाश में आई हमने सिडनी स्थित अपने वाणिज्य दूतावास में स्थित कर्मचारियों की सुरक्षा को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर सुनिश्चित किया। सुषमा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कल आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबट से बात की और बंधक संकट से निपटने तथा बंधकों की रिहाई के लिए उनके कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने दो निर्दोष बंधकों की मृत्यु पर उनके परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की।
Digital Desk: Shiv Kishor
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