जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की हत्या करने की साजिश से जुड़े मामले में नवनिर्माण सेना के एक कार्यकर्ता को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपी अमित जानी को यह कहते अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया कि मामले में उसकी भूमिका की जांच की जरूरत है। डीटीसी की बस में एक बैग से एक लोडेड पिस्तौल और एक धमकी भरा पत्र मिला था। इस पत्र में राजद्रोह के आरोपी व जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया और उमर खालिद को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जस्टिस प्रतिभा रानी ने कहा है मामले की जांच महत्वपूर्ण चरण में है, ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। आरोपी अमित जानी ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर अग्रिम जमानत देने की मांग की है। अर्जी में उसने पुलिस पर गलत तरीके से इस मामले में फंसाने का आरोप लगाया है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता राजेश सचदेवा ने हाईकोर्ट को बताया उनका मुवक्किल निर्दोष है क्योंकि उसने कन्हैया और उमर खालिद की हत्या करने को लेकर कोई पत्र नहीं लिखा है। साथ ही कहा है कि डीटीसी की बस से मिली बैग से बरामद हथियार से भी उनके मुवक्किल अमित जानी का कोई लेना देना नहीं है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने की मांग का विरोध किया कि बैग से मिले हथियार और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए थे और इसकी जांच की जरूरत है। पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया है कि धमकी भरे पत्र में आरोपी अमित जानी का हस्ताक्षर है, ऐसे में सच्चाई सामने लाने के लिए उसकी गिरफ्तारी जरूरी है।
Digital Desk: Kamal
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