शिवसेना ने मुखपत्र के जरिए सवाल उठाते हुए लिखा है, 'सवाल यह है कि राज्यपाल का पद चाहिए ही क्यों? यह सवाल वैसे ही पुराना है, फिर भी अपने-अपने राजनीतिक विचारों के कबाड़खाने मे पड़े लोगो की व्यवस्था करने के लिए ही राज्यपाल पद का उपयोग किया जाता है.' संपादकीय में राज्यपालों की नई सूची के बाबत लिखा गया है, 'देशभर के मौजूदा राज्यपालों की सूची पर नजर घुमाएं तो यह बात आसानी से ध्यान में आ जाती है. अब तक इन पदों पर नियुक्त किए गए सारे लोग 'बीजेपी' के कार्यकर्ता और नेता हैं. राज्यपाल, नायब राज्यपाल पद के कारण सत्ताधारी पार्टी के करीब 40 लोगों के लिए गाड़ी-घोड़ा, बंगला और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था हो जाती है.'
लेख में बीजेपी पर निशाना साधते हुए आगे लिखा गया है कि इन पदों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ती करनी होगी तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तेलगु देशम, अकाली दल, शिवसेना में भी पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री आदि लोग कर्तव्य निभाने के लिए तैयार हैं. एकाध राजभवन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के हिस्से में आने पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. अनुभवी और कर्तव्यनिष्ठ लोग मित्र दलों में भी भरपूर है. लेकिन सरकार 280 वाले चला रहे हैं, तब तक मित्रों की बातों को कोई सुनेगा ऐसा लगता नहीं है.संपादकीय में शिवसेना ने नए राज्यपालों को शुभकामनाएं भी दी हैं.
Digital Desk: Manish Patwa
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