2010-11 के दौरान टैंकर घोटाला सामने आया था। टैंकरों को पानी की सप्लाई के लिए किराए पर भी लिया जाता था। इन टैंकरर्स की सप्लाई वहां होनी थी, जिन इलाक़ों में पानी की पाइपलाइन नहीं थी। स्टेनलेस स्टील के 450 टैंकर किराए पर लिए जाने थे। इस काम के लिए सरकार ने 2010 में टेंडर निकाला जिसकी लागत 50.98 करोड़ रुपये रखी गई थी। 2010 का टेंडर रद्द कर अगले डेढ़ साल में चार बार टेंडर निकाले गए और इसकी लागत 50.98 करोड़ से बढ़ा कर 637 करोड़ रुपए कर दी गई थी। दिसंबर 2011 में 10 साल के लिए टैंकर किराए पर लिए गए थे।
Digital Desk: Manish Patwa
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