निकाय चुनावों के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की पूरी राजनीति में हलचल मच गई है। बीएमसी चुनावों में बुरा प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस अचानक से किंगमेकर की भूमिका में है। राज्य में अब कांग्रेस और शिवसेना के बीच बढ़ती नजदीकियों की अटकलें हैं। कांग्रेस से हाथ मिलाकर शिवसेना एक ही झटके में बीजेपी को राज्य और बीएमसी की सत्ता से दूर करने का बड़ा दांव खेल सकती है। कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि गठबंधन पर तब विचार होगा जब शिवसेना फडणवीस सरकार से कदम पीछे खींचेगी। उधर, शिवसेना नेता और परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने भी इस नए समीकरण को हवा देने वाला बयान दिया है। राज्य सरकार में दोनों सहयोगी शिवसेना और बीजेपी की बीएमसी में सीटें लगभग बराबर हैं। शिवसेना को 84 सीट मिली हैं जबकि बीजेपी को 82 सीटें हासिल हुई हैं। 227 सदस्यों वाली बीएमसी की सत्ता पर काबिज होने के लिए जादुई आंकड़ा 114 का बनता है। ऐसे में कांग्रेस 31 सीट की मदद से इस आंकड़े को पूरा करने के लिए परफेक्ट फिट नजर आ रही है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और परिवहन मंत्री दिवाकर राउते ने कहा है कि बीजेपी के साथ गठबंधन की संभावना तभी खत्म हो गई जब दोनों ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। शुक्रवार को महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण कह चुके हैं कि शिवसेना को बीएमसी में सपॉर्ट चाहिए तो उसे राज्य सरकार में बीजेपी का साथ छोड़ना होगा।
Digital Desk: Kamal
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