ये तीनों ही सांसद फिलहाल सीएम और डिप्टी सीएम की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं ऐसे में उनको अपनी नियुक्ति के 6 महीने के अंदर चुनाव जीतना होगा ताकि राज्य में मिली जिम्मेदारी को निभा पाएं। इसके लिए उनको संसद की सदस्यता छोड़नी होगी।
आपको बता दें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जून में किसी भी दिन जारी हो सकती है इसलिए भाजपा ने यह रणनीति बनाई है कि राष्ट्रपति चुनाव तक योगी, पर्रिकर और मौर्य अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा नहीं देंगे।
योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से और मौर्य फूलपुर से सांसद हैं जबकि पर्रिकर यूपी से ही राज्यसभा सांसद हैं।
लोकसभा में 77 प्रतिशत रही योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति
लोकसभा सदस्य के तौर पर संसद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति 77 प्रतिशत रही है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक सांसद योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान लोकसभा में 284 प्रश्न पूछे हैं, 56 चर्चाओं में हिस्सा लिया है और तीन निजी सदस्य विधेयक पेश किए हैं। योगी ने हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है लेकिन लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र अभी नहीं दिया है।
आदित्यनाथ की ओर से लाये गये विधेयकों में से एक गोरखपुर में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने संबंधी थी। 1998 में 26 वर्ष की आयु में राजनीति में आए आदित्यनाथ गोरखपुर सीट पांच बार जीत चुके हैं।
वहीं केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से भाजपा सांसद हैं। उनकी उपस्थिति 82 प्रतिशत रही है। हालांकि उन्होंने कोई निजी विधयेक पेश नहीं किया लेकिन उन्होंने 158 सवाल पूछे हैं और 122 चचार्ओं में हिस्सा लिया है।
Digital Desk: Administrator
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।