इसके अलावा विपक्ष इस बात पर भी सवाल खड़े करेगा कि किस तरह बीजेपी ने कोविंद की जाति को हाइलाइट कर के दलितों को लुभाने की कोशिश की है। विपक्ष के प्लान में ऐसे गैर-एनडीए दलों पर निशाना साधना भी शामिल होगा, जिन्होंने कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके लिए विपक्ष कोविंद को ऐसे व्यक्ति की के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा जिसकी एससी, एसटी और ओबीसी जातियों को नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण पर राय संदिग्ध है। विपक्ष अपने इन हमलों के लिए कोविंद द्वारा राज्यसभा में दिए गए भाषणों को आधार बनाएगा। 17 दिसंबर, 2004 में दिए गए एक भाषण में कोविंद ने कहा था कि 50 से ज्यादा सालों से जारी आरक्षण की वजह से एससी-एसटी-ओबीसी और सवर्ण जातियों के बीच कटुता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा था कि 'दोनों ही न्यायसंगत' है। कोविंद ने यह भी कहा था कि एससी, एसटी वर्ग को इस बात की चिंता है कि सरकारी नौकरियों में उनका 22.5% हिस्सा दशकों से नहीं भरा जा सका है, क्योंकि आरक्षण को लागू करने का काम गैर-आरक्षित जातियों के पास है।
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