मायावती का राज्यसभा से इस्तीफा: सिमट रहे वोट बैंक बचाने की बेचैनी !
(Lucknow, Lucknow) बहुजन समाज यानी दलित, पिछड़ों, वंचितों व शोसितों की राजनीति करने वाली मायावती का राज्यसभा से इस्तीफा देने का फैसला जल्दबाजी या अचानक नहीं है। वह बिना सोचे-सम कभी कोई काम नहीं करती..। उनके हर फैसले के पीछे लंबी सोच और रणनीति होती है। राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना भी एक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जानकार कहते हैं कि मायावती के इस्तीफे के पीछे हाथ से रेत की तरह फिसल रहे अपने वोट बैंक को सहजने की बेचैनी दिख रही है। मायावती यूपी की सत्ता में दलित और पिछड़े वोट बैंक के सहारे राज करती रही हैं। वह अपनी सभाओं में इन्हीं दलितों, पिछड़ों, वंचितों और शोसितों को हक दिलाने की वकालत भी करती रही हैं। वर्ष 2007 में 206 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली बसपा वर्ष 2012 के चुनाव में 80 सीटों पर पहुंच गई।

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