अमेरिका का प्रहार
(International) अमेरिका ने कश्मीर में सक्रिय हिज्बुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया। इसे आतंकवाद के मोर्चे पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। यह घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों की हिंसा को आजादी का संघर्ष बताने वाले पाक के लिए बड़ा झटका भी है। अमेरिका ने इससे पहले जून में हिज्बुल के सरगना सैय्यद सलाउद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। अमेरिकी वित्त मंत्री ने एक बयान में कहा कि ये प्रतिबंध हिज्बुल को आतंकी हमलों के लिए संसाधन जुटाने से रोकेगा।
हिज्बुल की अमेरिका में परिसंपत्तियां या उसके निवेश को भी जब्त कर लिया जाएगा। अमेरिकी नागरिक या अन्य एजेंसियां आतंकी संगठन से किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं रख पाएंगी। प्रतिबंधों के बाद अगर संगठन का कोई शख्स अमेरिकी एजेंसियों के हत्थे चढ़ता है तो उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है। गौरतलब है कि हालिया महीनों में हिज्बुल की तरफ से कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में काफी इजाफा हुआ है। उसको पाकिस्तान सेना और आईएसआई की ओर से भरपूर मदद मिल रही है। अमेरिका का यह सख्त निर्णय चीन के लिए भी संदेश है, जो आतंकवाद पर दोहरा मापदंड अपना रहा है। उसने जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर अड़ंगा लगा रखा है। पाकिस्तान हिजबुल को कश्मीरी युवाओं की आवाज बताता रहा है। पाक सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हिज्बुल के स्थानीय कमांडर बुरहान वानी को शहीद बताकर तारीफ की थी। वानी जुलाई 2016 में सुरक्षाबलों के हाथों मारा गया था।

Author: JAN TV Editorial Team

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