पार्टी सूत्रों के अनुसार दरअसल, पहले तो यह मालूम पड़ा कि विधान परिषद में चुने जाने के बाद इन दोनों के लिए अपनी-अपनी सीटों से इस्तीफा देना विधान परिषद सदस्यता की शपथ लेने के 14 दिन के अन्दर जरूरी है। उस समय यह फैसला किया गया कि एक या दो अक्तूबर को अपनी लोकसभा इस्तीफा देंगे। लेकिन तकनीकी तौर पर जिस दिन विधान परिषद में चुने जाने का प्रमाणपत्र मिलता है उसी दिन से 14 दिन के अन्दर इस्तीफा दे देना चाहिए।
अन्यथा 14 दिन बाद इनकी संसद सदस्यता स्वत ही समाप्त हो जाएगी। प्रमाणपत्र तो पिछले आठ सितम्बर को मिला था। इस हिसाब से इन दोनों को 22 सितम्बर तक इस्तीफा दे देना चाहिए। इस नियम के तहत भाजपा नेतृत्व ने तय किया कि योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य एक दिन पहले 21 सितम्बर को एक साथ दिल्ली जाकर लोकसभा सीटों से इस्तीफा दे दें।
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