राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए लोकसभा में फिर से विधेयक पेश करेगी सरकार...
(DELHI, DELHI) केंद्र सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संसद के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में फिर विधेयक पेश करेगी। सरकार के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार यह कदम राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा के लिये पूर्ण अधिकार प्रदान करने में मददगार होगा। एक अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है और संसद के आसन्न सत्र में इस विधेयक को लाने का निर्णय किया है।
उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित विधेयक को ओबीसी समुदाय के मतदाताओं पर पकड़ मजबूत बनाने के बीजेपी के कदम के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये राष्ट्रीय आयोग के समकक्ष दर्जा प्रदान करने के लिए सरकार ने पहले एक विधेयक पेश किया था। प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पहले लोकसभा में पेश किया गया जहां यह पारित हो गया। लेकिन राज्यसभा में यह कुछ संशोधनों के साथ पारित हुआ। इसके कारण विधेयक के दो तरह के प्रारूप दोनों सदनों से पारित हुए। ऐसे में अब विधेयक को लोकसभा में फिर से पेश किया जायेगा।
1- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1993 में बना था। यह जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू है। एक फरवरी 1993 से लागू हुआ।
2- इस आयोग का काम नागरिकों के किसी वर्ग के सूची में पिछडे़ वर्ग के रूप में शामिल किए जाने के अनुरोधों की जांच करना है। यह किसी वर्ग की सूची में किसी पिछड़े वर्ग के अधिक शामिल किए जाने या कम शामिल करने की शिकायतों की सुनवाई करता है। साथ ही यह केंद्र सरकार को ऐसे सुझाव देता है जो उसे उचित लगता है।
3- आयोग को 6 शक्तियां मिली हुई हैं। उनमें वह देश के किसी भी हिस्से से किसी व्यक्ति को समन करने और हाजिर कराने का अधिकार रखता है। किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने को कह सकता है।
4- आयोग का एक अध्यक्ष होता है जो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का न्यायाधीश हो या रहा हो।
5- अध्यक्ष के अलावा चार अन्य सदस्य होते हैं उनमें एक समाज विज्ञानी पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले दो व्यक्ति और एक भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी हो या रहा हो होते हैं।

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