शिवसेना ने मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में कहा कि तीन तलाक पर अगर केंद्र सरकार विधेयक लाती है तो यह एक अच्छा कदम होगा क्योंकि इससे मुस्लिम महिलाएं हमेशा के लिए मुक्त हो जाएंगी। प्रथा पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए और इसके चलन को अपराध माना जाना चाहिए। पार्टी ने दावा किया है कि इससे पहले शाहबानो की आवाज दबा दी गई। लेकिन शायरा बानो के मामले से यह मुस्लिम महिलाओं की आजादी की शुरुआत होगी।
संपादकीय में शिवसेना ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समान नागरिक संहिता और जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 खत्म करने के अपने साझीदार के लंबित दावे पर भी निशाना साधा है। पार्टी ने दावा किया है कि जिस तरह केंद्र सरकार तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रही है समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के साथ भी वैसा ही होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय यूसीसी पर तीन बार निर्देश दे चुका है लेकिन सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
पार्टी ने कहा है कि अनुच्छेद 370 के मुद्दे को सुलझाया जा सकता है लेकिन कश्मीरी नेताओं ने हमेशा इसका विरोध किया। संपादकीय में कहा गया है और राम मंदिर के लिए बीजेपी के पास केंद्र और उत्तरप्रदेश में समुचित राजनीतिक ताकत है। अगर सरकार इसे गंभीरता से ले तो वह लोगों से किए गये अपने वादे पूरे कर सकती है।
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