मध्य प्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत सांसदों को रियायती दर पर मिलने वाले भोजन के संबंध में जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि रियायती भोजन के चलते सदन या सरकार पर कितना आर्थिक बोझ पड़ता है। मामले में जो जानकारी सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। बताया गया है कि बीते पांच सालों में सांसदों के सस्ते भोजन पर 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दी गई।
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