इस मई महीने से वीर सावरकर की याद भी जुड़ी हुई है। 1857 में ये मई का ही महीना था, जब भारतवासियों ने अंग्रेजों को अपनी ताकत दिखाई थी। देश के कई हिस्सों में हमारे जवान और किसान अपनी बहादुरी दिखाते हुए अन्याय के विरोध में उठ खड़े हुए थे। बहुत लंबे समय तक 1857 की घटनाओं को केवल विद्रोह या सिपाही विद्रोह कहा जाता रहा। वीर सावरकर ने ही निर्भीक हो कर लिखा कि 1857 में जो कुछ भी हुआ वो कोई विद्रोह नहीं था बल्कि आजादी की पहली लड़ाई थी
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