महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को लेकर कई तरह के सवाल,भारत का संविधान ऐसी स्थिति के लिए क्या कहता है.
(MAHARASHTRA, MAHARASHTRA) नई दिल्ली.महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.शिवसेना सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के लिए विचार कर रही है.शिवसेना का आरोप है कि राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं.राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाए के लिए तीन दिन का समय नहीं दिया.शिवसेना ने राज्यपाल से तीन की मोहलत मांगी थी लेकिन इस मांग को ठुकरा दिया गया और राष्ट्रपति शाषन की सिफारिश कर दी गई.ऐसे में जानना ज़रूरी है कि भारत का संविधान ऐसी स्थिति के लिए क्या कहता है. दरअसल संविधान में कई तरह की स्थिति के लिए कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है.इसलिए जब भी राज्य या केंद्र सरकार बनने या गिरने या राष्ट्रपति शासन लगाने की बात होती है तो सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का ज़िक्र आता है.उसमे सबसे अहम है 11 मार्च 1994 का एसआर बोम्मई जजमेंटसंविधान में व्यवस्था दी गई है कि जब भी राज्य या केंद्र में सरकार बनानी है तो उसमें राज्यपाल या राष्ट्रपति सबसे पहले सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देंगे. अगर वह पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में ना हो तो चुनाव से पहले के सबसे बड़े समूह को सरकार बनाने के लिए कहा जाए. अगर ये भी संभव ना हो तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने की लिए कहा जाए. अगर ये भी संभव ना हो तो चुनाव के बाद बने समूह को सरकार बनाने के मौका दिया जाएगा.इसमें सबसे अहम बात ये है कि राज्य में सरकार बनने को लेकर राज्यपाल की अहम भूमिका होगी. राज्यपाल एक-एक कर राजनीतिक दलों या समूह को सरकार बनाने के लिए कहेंगे. लेकिन इस में राज्यपाल के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है. ये कहा गया है कि यानी जितना जल्द संभव हो.

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