अशोक गहलोत की कार्यशैली पर सबसे पहले सचिन पायलट ने ही सवाल खड़े किए थे। पायलट को राजस्थान के युवा कांग्रेसियों का प्रतिनिधि माना जाता है। पायलट की गहलोत सरकार के कामकाज से नाराजगी और उनके साथ खड़े कई युवा विधायक युवा नेता ही हैं। अगर उस संख्या को जोड़ दिया जाए तो नाराज युवा विधायकों की संख्या कहीं ज्यादा है। कांग्रेस के चिंतन शिविर में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने युवाओं को सत्ता और संगठन में 50 प्रतिशत भागीदारी देने का फार्मूला रखा था। जिससे कांग्रेस आलाकमान ने स्वीकृति भी दे दी थी। लेकिन नौकरशाही के रवैये से नाराज होकर इस्तीफा देने की धमकी दे रहे हैं।
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