गांधी ने लगभग ब्रेक लगा दिया है। 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे राहुल ने वरुण के बारे में जब कहा कि दोनों की विचार धाराएं
एक-दूसरे से काफी अलग हैं, तभी से माना जाने लगा कि वरुण के कांग्रेस में जाने की अटकलें सिर्फ कयास बाजी ही थीं और जमीन
पर इस बारे में कोई ठोस बातचीत नहीं चल रही। वरुण गांधी बीजेपी से कई सालों से साइड लाइन चल रहे हैं, जिसकी वजह से वह
पार्टी से नाराज हैं। उनकी नाराजगी पिछले दिनों तब और जग जाहिर हो गई, जब उन्होंने नेहरू के पक्ष में टिप्पणी की। इसके
अलावा, अपने चचेरे भाई राहुल की तरह ही उन्होंने हिंदू-मुस्लिम की राजनीति पर भी हमला बोला।
पिछले कुछ सालों में वरुण ने बीजेपी सरकार के कई फैसलों पर जमकर निशाना साधा है। अग्निवीर योजना, बेरोजगारी, किसान
आंदोलन समेत विभिन्न मुद्दों पर वरुण सरकार की योजनाओं के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि वरुण को शायद
ही बीजेपी से 2024 में टिकट मिले। ऐसे में वरुण दूसरे दल का रुख कर सकते हैं। सपा में बात नहीं बनती है तो वरुण के पास
बसपा का भी विकल्प खुला रहेगा। प्रदेश में वरुण गांधी काफी लोक प्रिय हैं। इसकी वजह से बसपा को लोकसभा चुनाव में फायदा
मिल सकता है। युवा चेहरे की वजह से वरुण पार्टी में नई जान फूंक सकते हैं। अपने भाषणों में किसानों, गरीबों की लगातार बात
करने के चलते इनके वोट भी मिलने की संभावनाएं हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कुल मिलाकर वरुण गांधी बीजेपी
छोड़कर किसी भी दल में जाते हैं तो उस दल को ही फायदा मिलने की उम्मीद है। गांधी परिवार से आनेकी वजह से कोई भी दल
हाथों-हाथ वरुण को पार्टी में लेने में पीछे भी नहीं हटेगा।
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