उनकी पत्नी ने रोते हुए बताया कि कुछ लोग रात में घर आए, दरवाज़ा खटखटाया और दिलीप को जबरन अपने साथ ले गए। वह समझ ही नहीं पाईं कि क्या हो रहा है। सुबह जब उनका शव सड़क किनारे पड़ा मिला, तो पूरा परिवार और मोहल्ला सन्न रह गया।
उनके शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे—जैसे किसी ने जानबूझकर बेरहमी दिखाई हो। मोहल्ले में इस खबर के बाद भय और आक्रोश का माहौल है। लोग पूछ रहे हैं, "क्या हमारे लिए अब इस देश में सुरक्षित रहना मुमकिन है?"
भारत सरकार ने इस घटना पर गहरी चिंता जाहिर की है और बांग्लादेश से अपील की है कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ मानवाधिकारों का हनन हैं, बल्कि दो देशों के संबंधों पर भी असर डालती हैं।
स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दिलीप के परिवार और साथियों को अब सिर्फ एक उम्मीद है—न्याय की
दिलीप की मौत सिर्फ एक इंसान की मौत नहीं है, वह उस भरोसे की भी मौत है जो अल्पसंख्यक समुदाय ने अपने देश की व्यवस्था पर किया था।
Author: JAN TV Editorial Team
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