जनरल चौहान ने कहा कि किसी भी सैन्य घटना का मूल्यांकन सिर्फ आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। जरूरी यह समझना है कि हमारे सिस्टम में क्या खामियां थीं और उन खामियों को कैसे दूर किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्ममंथन और रणनीतिक सुधार देश की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत-पाक संबंधों और सीमा पर सुरक्षा स्थिति को लेकर कई चर्चाएं हो रही हैं। जनरल चौहान के इस बयान को रक्षा नीति में पारदर्शिता और जिम्मेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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