सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर इशिबा को हटाने की मांग जोर पकड़ रही थी। पार्टी दो गुटों में बंटती नजर आ रही थी — एक प्रधानमंत्री के समर्थन में और दूसरा इशिबा के खिलाफ। इस दबाव भरे माहौल में प्रधानमंत्री ने पद छोड़ने का फैसला लिया।
अपने संक्षिप्त बयान में उन्होंने पार्टी की एकता को प्राथमिकता देने की बात कही और कहा कि देश की स्थिरता के लिए यह कदम जरूरी था।
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि पार्टी अगला नेता किसे चुनती है, और क्या यह इस्तीफा किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है।
Author: JAN TV Editorial Team
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