सम्मेलन में भारत ने 2026 को भारत–आसियान समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाने का सुझाव दिया। इससे समुद्री व्यापार और मछली उत्पादों के निर्यात को नई दिशा मिलेगी। इससे पहले 2025 को पर्यटन वर्ष बनाने का प्रस्ताव दिया जा चुका है, जो भारत और आसियान देशों के बीच पर्यटन को नई ऊंचाई देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि भारत और आसियान मिलकर 21वीं सदी को एशिया की सदी बना सकते हैं। एफटीए से दोनों तरफ के कारोबार को मजबूती मिलेगी और भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने की स्थिति से आगे बढ़ पाएगा। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद ने यह एहसास कराया है कि व्यापार में विविधता जरूरी है।
चीन और वियतनाम के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत और आसियान की साझेदारी दुनिया में शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। दोनों पक्ष दुनिया की 25 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इनके प्रयास क्षेत्रीय शांति और अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।
पर्यटन इस सहयोग का एक बड़ा हिस्सा है। भारतीय बड़ी संख्या में इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और मलयेशिया की यात्रा करते हैं। वहीं इन देशों से कई लोग भारत में बौद्ध धरोहरों को देखने आते हैं। इससे दोनों तरफ की अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होता है।
आसियान ने अपने कम्युनिटी विज़न 2045 को आगे बढ़ाने की बात कही है। भारत ने इस विज़न का पूरा समर्थन किया है और वादा किया है कि संकट की घड़ी में वह आसियान देशों के साथ सबसे पहले खड़ा रहेगा।
भारत और आसियान का साथ ना सिर्फ व्यापार बढ़ाएगा बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को नई ऊर्जा भी देगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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